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Saturday, July 24, 2010

गर्भवती महिलाएं रोजाना पी सकती हैं 1 कप कॉफी


गर्भवती महिलाएं कॉफी का आनंद ले सकती हैं। अमेरिकी शोधकर्ताओं का कहना है कि हर रोज सुबह एक प्याला कॉफी लेने से गर्भवती महिलाओं के बच्चे पर कोई नकारात्मक असर नहीं पड़ेगा।
'मेल ऑनलाइन' के मुताबिक शोधकर्ता कहते हैं कि एक प्याला कॉफी में मौजूद 200 मिलीग्राम कैफीन से गर्भपात या अविकसित बच्चे के जन्म का खतरा नहीं होता।
पहले महिलाओं से गर्भावस्था के दौरान कॉफी न पीने के लिए कहा जाता था। इसकी वजह यह थी कि ऐसा माना जाता था कि इससे भ्रूण को नुकसान पहुंचता है और जन्म के समय बच्चे का वजन कम होता है।
'अमेरिकन कॉलेज ऑफ ऑब्सटीट्रिशियंस एंड गायनिकोलॉजिस्ट्स' द्वारा किए गए इस शोध में पूर्व के दो अध्ययनों का विश्लेषण किया गया था। इन अध्ययनों में 1,000 गर्भवती महिलाओं पर कॉफी सेवन का प्रभाव देखा गया था।
एक अध्ययन में पाया गया था कि अपनी गर्भावस्था की विभिन्न अवस्थाओं के दौरान कॉफी की कम मात्रा लेने वाली महिलाओं में गर्भपात की दर नहीं बढ़ी थी।
जिन महिलाओं ने प्रतिदिन 200 मिलीग्राम कैफीन से ज्यादा कैफीन का सेवन किया उनमें गर्भपात का खतरा बढ़ा था।
वैसे वैज्ञानिकों ने चेतावनी दी है कि मां बनने वाली महिलाओं को एक दिन में दो प्याला से ज्यादा कॉफी नहीं पीना चाहिए क्योंकि इससे गर्भपात या अविकसित शिशु के जन्म का खतरा बढ़ जाता है।

बुजुर्गो के लिए 1-2 पैग है फायदेमंद


शराब का सेवन करने वाले बुजुर्गो के लिए शराब का सेवन फायदेमंद साबित हो सकता है। वैज्ञानिकों ने दावा किया है कि रात का भोजन करने के बाद एक या दो पैग शराब का सेवन करने वाले बुजुर्गो में दिल की बीमारी, मधुमेह तथा मानसिक विकृति के खतरों को कम कर सकता है।
शोधकर्ताओं का कहना है कि एक या दो पैग लेने वाले बुजुर्गो की मृत्यु दर में 30 फीसदी की कमी हो सकती है। रात का भोजन करने के बाद शराब पीने का आनंद लेना अच्छा साबित हो सकता है क्योंकि शराब से भोजन जल्दी पच सकता है। ऐसे में इसका सेवन करने वाले अपने आपको काफी हल्का महसूस करेंगे।
स्थानीय समाचार पत्र 'डेली मेल' के मुताबिक वेस्टर्न आस्ट्रेलिया विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं ने इस प्रभाव को जानने के लिए 65 वर्ष से अधिक लगभग 25,000 लोगों पर यह प्रयोग किया।
अंतर्राष्ट्रीय विज्ञान फोरम ऑन एल्कोहल रिसर्च से संबद्ध हेलेना कानीबियर ने कहा कि अधिकांश बुजुर्गो की मौत धमनियों के बंद हो जाने से होती है। धमनियों के बंद हो जाने से रक्त का प्रवाह कम हो जाता है। इस वजह से मानसिक विकृति, दिल की बीमारियां और कई तरह के दौरे पड़ने का खतरा बना रहता है।
हेलेना कहती हैं कि शराब रक्त को पतला बना देता है और धमनियों के सूजन को कम कर उन्हें खुला रखने में सहायता करता है। यह इंसुलिन बढ़ाने में मदद भी करता है जिससे मधुमेह होने का खतरा कम हो जाता है।

Friday, July 23, 2010

नवजात की देखभाल में उड़ा देती है नींद


नवजात की परवरिश 'बच्चों' का खेल नहीं। इसका खामियाजा माता-पिता को अपनी नींद को कुर्बान करके भुगतना पड़ता है।
एक शोध से पता चला है कि जन्म से दो वर्ष तक एक बच्चे की परवरिश के दौरान माता-पिता को अपनी छह महीने नींद गंवानी पड़ती है।
समाचार पत्र 'डेली टेलीग्राफ' के मुताबिक 1000 माता-पिता पर किए गए शोध ने यह साफ कर दिया है कि शुरुआती दो वर्षो में वे रात में सिर्फ चार घंटे की निर्बाध नींद ले पाते हैं।
वैसे नींद का एक पूरा चक्र पूरा करने के लिए कम से कम पांच घंटों तक सोने की जरूरत होती है, लेकिन नवजात की देखभाल के कारण माता-पिता को शुरुआती दो वर्षो तक औसतन एक घंटा कम सोने को मिलता है।
तीन में से दो माता-पिता ने माना कि उन्हें एक बार में सिर्फ तीन से सवा तीन घंटे की ही नींद मिल पाती है। कुछ तो ऐसे भी हैं, जिन्होंने कहा कि वे सिर्फ ढाई घंटे सो पाते हैं।
ऐसे में माता-पिता को अपनी दिनचर्या को पटरी पर लाने के लिए क्या करना चाहिए। नींद के विशेषज्ञ इफ्तिखार मिर्जा का कहना है कि इस दौरान माता-पिता को पौष्टिक आहार लेना चाहिए जिससे कि उनके शरीर की प्रतिरोधक क्षमता मजबूत बनी रहे।
साथ ही रोजाना कुछ समय तक व्यायाम करना चाहिए। इससे शरीर से एंड्रोफिन्स का निकास होता है। एंड्रोफिन्स को मनोभाव में तेजी से बदलाव आने के लिए जिम्मेदार माना जाता है।

Thursday, June 17, 2010

पुरुषों के शुक्राणु विकास के लिए कौन है जिम्मेवार


वैज्ञानिकों ने पहली बार ऐसे लक्षणों की पहचान का दावा किया है जो बढ़ती उम्र के कुछ पुरुषों में महिलाओं की ही तरह प्रजनन क्षमता के ह्रास अथवा रजोनिवृत्ति के लिए जिम्मेदार होते हैं।
वैज्ञानिकों के अनुसार पुरुषों और महिलाओं की रजोनिवृत्ति में मुख्य अंतर यह है कि महिलाओं में जहां सभी को इस प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है वहीं पुरुषों में अधिक उम्र के केवल दो प्रतिशत पुरुष ही इससे दो चार होते हैं, जिसे आम तौर पर खराब स्वास्थ्य और मोटापे से जोड़कर देखा जाता है।
मैनचेस्टर विवि और लंदन के इंपीरियल कालेज और लंदन विश्वविद्यालय के दल ने आठ यूरोपीय देशों से नमूने एकत्र कर इस प्रयोग को अंजाम दिया। इसमें उन्होंने 40 से 79 साल के पुरुषों में टेस्टोरान [मेल सेक्स हार्मोन जो शुक्राणु बनने और प्रजनन के लिए उतरदाई होता है] के स्तर का अध्ययन कर उक्त निष्कर्ष निकाला।
वैज्ञानिकों के दल ने लोगों से उनके शारीरिक, भौतिक और मनोवैज्ञानिक स्वास्थ्य और उससे जुड़े कुछ सवाल पूछे और पाया कि 32 लोगों में से केवल नौ लोगों में उक्त लक्षण टेस्टोरान का स्तर सामान्य से कम होने की वजह से थे। इनमें तीन यौन लक्षण सबसे महत्वपूर्ण रहे।
पहला सुबह के समय कामोत्तेजना में कमी, दूसरा यौन विचारों में कमी और तीसरा उत्थानशीलता में कमी शामिल
दल ने यह निष्कर्ष निकाला कि यदि किसी पुरुष में यौन प्रवृतियों के यह तीन लक्षण और टेस्टोरान हार्मोन के स्तर में कमी पाई जाए तो इसका मतलब है कि उक्त पुरुष रजोनिवृत्ति की प्रक्रिया से गुजर रहा है, लेकिन उस व्यक्ति में इसके अलावा कुछ गैर यौन लक्षण भी पाए जा सकते हैं।
इसमें उन्होंने तीन शारीरिक लक्षणों को चिन्हित किया, जिसमें दौड़ने या वजन उठाने जैसे भारी काम कर पाने में अक्षमता, एक किमी से अधिक की दूरी तक न चल पाना और झुकने और बैठने में परेशानी होना शामिल है। इसके अलावा मनोवैज्ञानिक तौर पर जो लक्षण सामने आए उनमें, ऊर्जा की कमी, उदासी और कमजोरी शामिल हैं।
यह शोध लंदन की शोध पत्रिका न्यू इंगलैंड जर्नल आफ मेडिसिन में प्रकाशित हुआ है।

Friday, June 4, 2010

अस्थमा को दावत देता है बर्गर!


यदि आप बर्गर खाने के शौकीन हैं तो संभल जाइए। एक नए शोध में पता चला है कि जो बच्चे जंक फूड पसंद करते हैं और सप्ताह में कम से कम तीन बर्गर खाते हैं, वे अस्थमा जैसी बीमारी को दावत दे रहे हैं।
वेबसाइट 'एक्सप्रेस डॉट को डॉट यूके' की ओर से जारी की गई एक रिपोर्ट में बताया गया है कि शोधकर्ताओं ने इसके अध्ययन के लिए 20 देशों के 50,000 बच्चों को शामिल किया। शोध में पाया गया है बर्गर खाने वाले बच्चों को अस्थमा होने का खतरा अधिक होता है।
इस शोध में पाया गया कि ऐसे युवा जो फल, सब्जियों और मछली का सेवन करते हैं उनमें बीमारी से प्रभावित होने का खतरा कम रहता है।

Wednesday, June 2, 2010

न करें सुबह के नाश्ते को नजरअंदाज!


यदि आप एसिडिटी, मोटापे की शिकायत से जूझ रहे हैं और आपको किसी काम में ध्यान लगाने में परेशानी हो रही है तो शायद इसकी वजह आपका सुबह का नाश्ता न लेने की आदत है। ब्रेन फूड कहा जाने वाला सुबह का नाश्ता दिनभर का सबसे महत्वपूर्ण आहार है।
ज्यादातर शहरी लोग या तो अपनी व्यस्ततम जीवनशैली की वजह से नाश्ते को नजरअंदाज करते हैं या फिर वे सोचते हैं कि नाश्ता न लेने से छरहरी काया हासिल की जा सकती है। वजह जो भी हो, लेकिन विशेषज्ञ कहते हैं कि इससे लोगों में मोटापे की शिकायत हो सकती है।
बत्रा अस्पताल की मुख्य आहार विशेषज्ञ अनीता जटाना ने को बताया कि ऐसा लगता है कि इन दिनों लोगों के पास सुबह के नाश्ते के लिए समय नहीं है। उनके पास पौष्टिक नाश्ता करने की स्वस्थ परंपरा से बचने के सभी कारण हैं।
वह इसे धारणा और जीवनशैली में बदलाव मानती हैं। उनका कहना है कि लोग कई वजहों से सुबह का नाश्ता नहीं करते। इनमें व्यस्तता, रात में देर से भोजन करना, खुद को छरहरा बनाने सहित कई वजहें शामिल हैं। इस तरह से वह अच्छे स्वास्थ्य के लिए जरूरी सुबह के नाश्ते से दूर रहते हैं।
आहार विशेषज्ञों के मुताबिक सुबह का नाश्ता बहुत जरूरी है। वे कहते हैं कि नाश्ता संतुलित होना चाहिए और इसमें कैल्शियम [दूध या दूध से वस्तुएं], प्रोटीन, रेशेदार पदार्थ [अंकुरित अनाज] और एंटीऑक्सीडेंट्स [सेब, स्ट्रॉबेरी, केला, संतरा] और विटामिन होने चाहिए।
मैक्स अस्पताल की मुख्य आहार विशेषज्ञ ऋतिका सामादार कहती हैं कि प्राय: ब्रेन फूड कहे जाने वाले सुबह के नाश्ते का संपूर्ण होना आवश्यक है और इसमें शरीर के लिए जरूरी सभी पोषक तत्व होने चाहिए। शरीर की चयापचय प्रक्रिया के बेहतर होने के लिए सुबह पोषक नाश्ता लेना बहुत जरूरी है।
उनका कहना है कि रात के खाने और सुबह के नाश्ते के बीच 10 से 12 घंटे का अंतराल हो जाता है, जो कि बहुत लंबा समय है। ऐसे में यदि नाश्ता न किया जाए तो यह अंतराल और भी बढ़ जाता है और इस तरह से शरीर की चयापचय प्रक्रिया प्रभावित होती है।