Thursday, June 17, 2010

पुरुषों के शुक्राणु विकास के लिए कौन है जिम्मेवार


वैज्ञानिकों ने पहली बार ऐसे लक्षणों की पहचान का दावा किया है जो बढ़ती उम्र के कुछ पुरुषों में महिलाओं की ही तरह प्रजनन क्षमता के ह्रास अथवा रजोनिवृत्ति के लिए जिम्मेदार होते हैं।
वैज्ञानिकों के अनुसार पुरुषों और महिलाओं की रजोनिवृत्ति में मुख्य अंतर यह है कि महिलाओं में जहां सभी को इस प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है वहीं पुरुषों में अधिक उम्र के केवल दो प्रतिशत पुरुष ही इससे दो चार होते हैं, जिसे आम तौर पर खराब स्वास्थ्य और मोटापे से जोड़कर देखा जाता है।
मैनचेस्टर विवि और लंदन के इंपीरियल कालेज और लंदन विश्वविद्यालय के दल ने आठ यूरोपीय देशों से नमूने एकत्र कर इस प्रयोग को अंजाम दिया। इसमें उन्होंने 40 से 79 साल के पुरुषों में टेस्टोरान [मेल सेक्स हार्मोन जो शुक्राणु बनने और प्रजनन के लिए उतरदाई होता है] के स्तर का अध्ययन कर उक्त निष्कर्ष निकाला।
वैज्ञानिकों के दल ने लोगों से उनके शारीरिक, भौतिक और मनोवैज्ञानिक स्वास्थ्य और उससे जुड़े कुछ सवाल पूछे और पाया कि 32 लोगों में से केवल नौ लोगों में उक्त लक्षण टेस्टोरान का स्तर सामान्य से कम होने की वजह से थे। इनमें तीन यौन लक्षण सबसे महत्वपूर्ण रहे।
पहला सुबह के समय कामोत्तेजना में कमी, दूसरा यौन विचारों में कमी और तीसरा उत्थानशीलता में कमी शामिल
दल ने यह निष्कर्ष निकाला कि यदि किसी पुरुष में यौन प्रवृतियों के यह तीन लक्षण और टेस्टोरान हार्मोन के स्तर में कमी पाई जाए तो इसका मतलब है कि उक्त पुरुष रजोनिवृत्ति की प्रक्रिया से गुजर रहा है, लेकिन उस व्यक्ति में इसके अलावा कुछ गैर यौन लक्षण भी पाए जा सकते हैं।
इसमें उन्होंने तीन शारीरिक लक्षणों को चिन्हित किया, जिसमें दौड़ने या वजन उठाने जैसे भारी काम कर पाने में अक्षमता, एक किमी से अधिक की दूरी तक न चल पाना और झुकने और बैठने में परेशानी होना शामिल है। इसके अलावा मनोवैज्ञानिक तौर पर जो लक्षण सामने आए उनमें, ऊर्जा की कमी, उदासी और कमजोरी शामिल हैं।
यह शोध लंदन की शोध पत्रिका न्यू इंगलैंड जर्नल आफ मेडिसिन में प्रकाशित हुआ है।

1 comment:

आचार्य जी said...

बढिया लेख।