Tuesday, August 19, 2008

तिलचट्टा बना किंग व दीमक बनी क्वीन

दक्षिण-पूर्व एशिया के सौ से भी अधिक विशेषज्ञों के सम्मेलन में जहां कीटों को नियंत्रित करने के लिए नए कीटनाशक के प्रयोग पर चर्चा कर रहे थे वहीं वे इसे ग्लोबल वार्रि्मग के लिए एक बड़ा योगदान मानते हैं।
बैंकाक में हुए एक सम्मेलन में तिलचट्टा राजा और दीमक रानी की धूम रही। सम्मेलन तो कीट नियंत्रण पर चर्चा के लिए था, लेकिन इस दौरान एक प्रतियोगिता भी आयोजित की गई। प्रतियोगिता कीटों की थी। जीतने वाले को 'तिलचट्टा राजा' और 'दीमक रानी' के खिताब से नवाजा गया। साथ ही, 300 अमेरिकी डालर [करीब 1400 रुपये] का इनाम भी था।

एक खास प्रजाति के 4.2 सेमी लंबे कीट को 'तिलचट्टा राजा' का खिताब दिया गया। जिसे 'दीमक रानी' के खिताब से नवाजा गया, उसकी लंबाई 7.1 सेमी थी। इनामी राशि इनके मालिकों को सौंपी गई। तेरह से पंद्रह अगस्त तक चले इस सम्मेलन के अध्यक्ष ने कहा कि यह प्रतियोगिता कीट नियंत्रण की दिशा में अपने आप में एक महत्वपूर्ण कोशिश थी।

सम्मेलन में कीटों के बारे में कई दिलचस्प बातें सामने आई। थाईलैंड के कीट प्रबंधन संघ के निदेशक सचाट लीलायुथोटिन ने कहा कि प्रत्येक तिलचट्टा अपनी पूरी उम्र के दौरान 600 बच्चे पैदा करता है। प्रतियोगिता में सौ से भी अधिक तिलचट्टे शामिल हुए। इसका मतलब यह है कि हमने किसी रसायन का उपयोग किए बिना साठ हजार तिलचट्टे कम कर दिए। यही इस प्रतियोगिता की खासियत है।

दीमकों की रानी के बारे में उन्होंने बताया कि यह तो अंडा देने की मशीन है। इस तरह हम हर मादा दीमक को अलग रख कर तत्काल एक लाख दीमकों पर नियंत्रण पा लेते हैं।

बहरहाल, जिस तिलचट्टे ने खिताब जीता उसे कुआलालंपुर की एक महिला येप बेंग कियोक ने सप्ताह भर पहले पकड़ा था। दीमकों की रानी को थाईलैंड के खाओ लैक सैन्य शिविर से निकाला गया था।

4 comments:

बालकिशन said...

रोचक जानकारी के लिए आभार.

प्रवीण त्रिवेदी said...

रोचकता के साथ ज्ञान वर्धक भी !
पर जानना चाहूँगा की क्या यह नामकरण वास्तव में गंभीरता के साथ किया गया है ?
यदि हाँ , तो साइंस की पढ़ाई अब बोझिल कंहाँ रही?

http://primarykamaster.blogspot.com/

पर एक निवेदन और चलते चलते - कृपया यह वर्ड-वेरिफिकेशन हटाये ही रखे तो अच्छा रहेगा /
बाकि आपकी इच्छा ?

राज भाटिय़ा said...

धन्यवाद रोचक जान कारी के लिये

Anil Pusadkar said...

rochak aur gyanwardhak